 माळवी गजलभई-बंदी नी निभाय, लोग भारी करे रे काळजो जळी जाय लोग भारी करेजद देखो जद, भाटाज मारे वी बोल मेंकईं मिश्री नी घोळाय, लोग भारी करेपाणी की ताण पड़े, पण पाणी नी रोकेखड़ा खेत सूखी जाय, लोग भारी करेटीवी खूब देखे, ने सिनेमा को मजो लेसंतान के नी भणाय, ... आगे पढ़ें...
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 पगे लागूँ बापजी !!लेखक : मोहन रावलकदी-कदी म्हारा मन में आवे के यूँज काँदा ना फोंतरा हेड़वा से कँई फायदो ! पण इना मन पे अपणॉ बस नी चले. ने मन ऊज काम करें जिमे विने मजो आवे. यों मन कोई का बाप की बी नी सुणे. एक दिन म्हारो मन बोल्यो के बापड़ा भोळाराम के साँथे ... आगे पढ़ें...
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अमेरिका में बिकी गयों गाँधी बाबा को चस्मो. लेखक मोहन रावल भई रे ! गज़ब वईग्यो ! गाँधी बाबा को चस्मो अमेरिका में बिकी गयो. गाँधीजी जद वीना चस्मा ने पेनता था तो विनके सबसे गरीब आदमी दिखतो थो. अब जिनका कने भी ऊ चस्मो होगा ऊ अमेरिका की तरे सोचेगा ,ने ... आगे पढ़ें...
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 -------स्वयँभू संत श्रीज्ञानीजी ------अपणा भारत में कई ऐसा सिवलिंग है जो कि स्वयंभू है, मतलब के अपणे आप सिवलिंग बण्या, ने परगट हुवा.ने आज पूजई रिया है. अपणा देस में ऐसा लोग भी पैदा हुआ के गरीब घर में जनम लई ने स्वयंभू सिवलिंग की तरह पुजाया है,. महात्मा ... आगे पढ़ें...
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---------- चुनावी चीर- हरण -------कँईं सुण्यो! फेर अईग्यो! फेर अइग्या उखाड़्-पछाड़ का दन, मसाण जगावा को टेम. चुनाव को डंको बजीग्यो है. लेरयो साफो पेरी ने गाम-गाम जीप दौड़ावा को टेम फेर अइग्यो है. लोग भूलीग्या के पाणी नी पड़्यो है! लोग भूलीग्या के ... आगे पढ़ें...
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 ------श्री नरहरि पटेल का अभिनंदन---------मध्य... आगे पढ़ें...
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 ------ अब कँइँ कराँगाँ !पाणी ज नी पड़्यो अब कँइँ कराँगाँ !सामे अकाळ खड़्यो, अब कँइँ कराँगाँपेट कीं आग नी बुझेगी सोयाबीन से पेट में खाड़ो पड़्यो, अब कँइँ कराँगाँगऊँ, चणा तो, बेमौत मरेगा इना सालकिसाण सूळी चढ़्यो, अब कँइँ कराँगाँकिदो थो के रोकिलो बरसात को ... आगे पढ़ें...
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 ---- गाम में जनम मत दी जो भगवान ------जिना इस्कुल की हूँ वात करी रियो हूँ , वैसो इस्कुल तो कमी बेसी हरेक छोटा गाम में मिळी जाएगा. इस्कुल तो सरसती को मंदर है तो, एक दन म्हारा मन में अई के चलो आजकल का इस्कुल के देखाँ तो सई. छोटो सो गाम सड़क का किनारे, ... आगे पढ़ें...
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 --------प्यासो माळवो---पाणी बाबा ये खेर करी, पण कंजूसी करी ग्या. काँ तो लोग केवात केता था के " माळव धरती गहर गंभीर , डग्-डग रोटी, पग-पग नीर्, ने अब धरती को पेट 400 फूट फाडाँ जद जई के पाणी का दरसण होवे है, ने कदी तो एक बूँद भी नी मिळे. भई ! ऐसो कँई ... आगे पढ़ें...
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 पाणी नी रोकोगा तो, भैया खतम हुई जाओगा,अनाज कम पैदा होगा तो, कँई घास खाओगा , भणत-लिखत पे मरी री है या आखी दुनिया,बच्चा के नी भणाओगा तो, गमाजी केलाओगा.साब की बेटी भणी ने लंदन में मजो मारी री छोरी नी भणे तो, कँई दूसरा को घर डूबाओगा. नया बीज ने जैविक खाद को ... आगे पढ़ें...
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 पाणी रोको !नद्दी बाँदी लो रे भैया, नाळा बाँदी लो, खाळी और खाळ पे पाळा बाँदी लो, बरसा को पाणी यो बेवी नही जाय्,पाणी जो बेवे तो लछमी रूठी जाय, लछमी जो होय, खरीदी सोनो चाँदी लो, नद्दी बाँदी लो रे भैया, नाळा बाँदी लो.तळई खोदी लो रे भैया, पाणी रोकी लो ... आगे पढ़ें...
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 अपण तो माळवी लोग हाँ, तो बात तो माळवी कीज कराँगा . अपणी माळवी घणी मीठी है. गुजराती, राजस्थानी ने मराठी को घोळ बणायो, जद जईके बणी अपणी माळवी. तो, लई लो मजो माळवी दोहा को . माळवी घणी मीठी है, जरा मीठा सुर में गा जो. --- दोहा पाणी का --पाणी की महिमा ... आगे पढ़ें...
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